शनि देव को खुश करने के 10 महाउपाय: साढ़ेसाती हो या ढेया, तुरंत मिलेगा लाभ

शनि देव को खुश करने के 10 महाउपाय: साडेसाती हो या ढेया, तुरंत मिलेगा लाभ

ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्यायाधीश यानी न्याय का देवता कहा गया है।

अक्सर लोग शनि का नाम सुनते ही डर जाते हैं। उन्हें लगता है कि शनि केवल कष्ट देते हैं, लेकिन गृह ज्ञान के अनुसार यह सच नहीं है।

शनि देव हमारे कर्मों का फल देते हैं। अगर आपके कर्म अच्छे हैं तो शनि आपको रंग से राजा भी बना सकते हैं। 

शनि देव को खुश करने के 10 महा-उपाय: साढ़े साती हो या ढैया, तुरंत मिलेगा लाभ (Shani Dev Ke Upay)

आज के इस लेख में हम जानेंगे की कुंडली में शनि खराब होने के लक्षण क्या है और वह कौन से शनि देव के उपाय है जिन्हें अपना कर आप साडेसाती और दया के प्रकोप को शांत कर सकते हैं। 

यह न केवल धार्मिक है बल्कि आपके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी लाएंगे।

कैसे पता करें कि आपको शनि खराब

पहले यह जाना जरूर है कि क्या वास्तव में शनि देव आपसे नाराज है? 

अगर कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हो तो जीवन में यह संकेत मिलते हैं: 

*अचानक धन हानि: जमा किया हुआ पैसा अचानक किसी बीमारी या वाद विवाद में खर्च हो जाना। 

*जूते चप्पल खोना: अगर आपके जूते चप्पल बार-बार टूटे हैं या शनिवार को खो जाते हैं। 

*अलसी और कम टालना: मिनी किसी वजह से बहुत ज्यादा आलस आना और आज का काम पर टालना। 

*लोहे से चोट: बार-बार लोहे की चीजों से चोट लगा या वाहन दुर्घटना। 

*कानूनी पचड़े: झूठे आरोप लगा या कोर्ट कचहरी के मामलों मेंफसना। 

*बाल और नाखून: समय से पहले बाल झड़ना या बहुत रुके हो जाना। 

अगर आपको इनमें से तीन या अधिक लक्षण दिख रहे हैं तो आपके नीचे दिए गए उपाय को जरूर अपनाना चाहिए। 

शनि देव को प्रसन्न करने के 10 अचूक उपाय: शनि देव को प्रसन्न करना बहुत आसान है। वह दिखावे से नहीं बल्कि आपकी भावना और मेहनत से खुश होते हैं। 

1. छायादान: सबसे शक्तिशाली उपाय। सनी दोस्त को दूर करने के लिए छायादान को सबसे उत्तम माना गया है।

 – विधि: शनिवार की शाम को एक लोहे या स्टील की कटोरी में सरसों का तेल ले। उसमें ₹1 का सिक्का डालें। अब उसे तेल में अपना चेहरा देखकर और फिर यह तेल किसी डाकू को दान कर दें या शनि मंदिर में रख आए।

– लाभ: इससे शनि की अशुभ प्रभाव और शारीरिक अर्थ तुरंत काम होते हैं।

 2. हनुमान जी की आराधना: पुराने कदम के अनुसार शनि देव ने हनुमान जी का भजन दिया था कि जो भी हनुमान जी की पूजा करेगा उसे वह कभी नहीं सताएंगे।

– विधि: हर शनिवार और मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें। हो सके तो शनिवार को सुंदरकांड का पाठ करें। 

– लाभ: इससे वह समाप्त होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।

 3. पीपल के वृक्ष की सेवा: पीपल के पेड़ में सभी देवी देवताओं का वास माना जाता है लेकिन यह शनिदेव को विशेष प्रिय है।

– विधि: शनिवार के दिन सूर्यास्त के बाद पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। दीपक जलाने के बाद पीछे मुड़कर ना देखें।

– लाभ: इससे प्रीति दोष और शनि दोष दोनों में राहत मिलती है।

 4. कर्म सुधारे: मधुर का सामान शनिदेव कर्म फल दाता है और वह मजदूर वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं।

– विधि: अपने घर में काम करने वाले नौकर सफाई कर्मचारी या किसी भी मजदूर के साथ बुरा व्यवहार ना करें। उन्हें समय पर पैसा दे और कभी-कभी मिठाई या नमकीन खिलाए।

– लाभ: यह उपाय किसी भी मंत्र से ज्यादा असरदार है। इसे शनि देव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं।

 5. काले कुत्ते और कौवे को भोजन: जानवरों की सेवा करने से ग्रह बहुत जल्दी शांत होते हैं।

– विधि: शनिवार के दिन काले कुत्ते को सरसों के तेल से चुपड़ी हुई रोटी खिलाए। इसके अलावा गोवा को दान या रोटी खिलाने से शनि प्रसन्न होता है।।

– लाभ: इसे केतु और शनि दोनों के आशु प्रभाव खत्म होते हैं।

 6. दशरथ कृति शनि स्त्रोत का पाठ: जो ज्यादा दशरथ ने राज्य में शनि का प्रकोप हुआ था तो उन्होंने शनि देव की स्तुति की थी।

– विधि: शनिवार को स्नान करके दूसरे की शनि स्त्रोत का पाठ करें। यह इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध है 

– लाभ: साढ़ेसाती के दौरान होने वाले मासिक परेशानी में अगर रामबाण है।

 7. लोहे का छल्ला धारण करें:

– विधि: घोड़े की नाल या नव कि कल से बनी लोहे की अंगूठी को शनिवार के दिन मध्यमा अंगुली में धारण करें। ध्यान रहे इस आग में टपकर नहीं बल्कि पीट कर बनाया जाना चाहिए। 

– लाभ: यह आपको दुर्घटना और बुरी नजर से बचाता है।

 8. शनिवार का व्रत: 

अगर आपकी कुंडली में शनि मार्ग नहीं है तो आप व्रत रख सकते हैं। 

– विधि: शनिवार के दिन एक समय भोजन करें बिना नमक का। काली उड़द की दाल या खिचड़ी का सेवन करें। 

– लाभ: इसे स्वास्थ्य बेहतर होता है और व्यापार में तरक्की मिलती है।

 9. इन चीजों का दानकरें: शनिवार को कई चीजों का दान करें विशेष फलदाई होता है। 

– दान सामग्री: काला कपड़ा काला तिल उड़द की दाल लोहे के बर्तन छत या काले जूते। 

– किस दे: किसी जरूरतमंद गरीब या दिव्यांग व्यक्ति को

 10. वैदिक शनि मंत्र: पूजा करते समय इस मंत्र का 108 बार जाप करें। 

मंत्र:

ॐ शं शनैश्चराय नमः 

  या

ॐ प्रां प्री प्रोम स: शनिश्चराय नमः 

शनिवार को भूलकर भी यह गलतियां ना करें –

हम उपाय तो करते हैं लेकिन कुछ ऐसी गलती अगर बैठते हैं जिससे शनि देव नाराज हो जाते हैं।

शनिवार को इन बातों का ध्यान रखें –

– लोहा ना खरीदें: शनिवार को घर में लोहे का सामान जैसे कैची चाकू गाड़ी खरीद कर ना लाएं। आप लोहे का दान कर सकते हैं लेकिन खरीद नहीं सकते। 

– नमक ना खरीदें: शनिवार को नमक खरीदने से घर में कर्ज और दरिद्रता आती है। 

– सरसों का तेल ना खरीदें: शनिवार को तेल केवल दान करना चाहिए, घर के इस्तेमाल के लिए खरीदना अशुभ माना जाता है। 

– शराब और मन से दूरी: अगर आप साढ़ेसाती से गुजर रहे हैं, तो शनिवार के दिन नॉनवेज और शराब का सेवन बिलकुल न करें। यह शनि के प्रकोप को कई गुना बढ़ा सकता है।

क्या शनि देव हमेशा बुरा करते हैं?

यह सबसे बड़ी गलतफहमी है। शनि देव दुख नहीं देते हुए सिर्फ सोजन करते हैं। वह आपको तो पैसा की भट्टी में टपकर कुंदन बनाते हैं।

– तुला मकर और कुंभ राशि वालों के लिए शनि अक्षर राजयोग कारक होते हैं।

– जो शनि शुभ होते हैं तो व्यक्ति को राजनीति वकालत और बिजनेस में बहुत ऊंचाई या तक ले जाते हैं। 

निष्कर्ष: 

      दोस्तों शनि देव से डरने की जरूरत नहीं बल्कि अपने कर्मों को सुधारने की जरूरत है। ऊपर बताए गए उपाय तभी काम करेंगे जब आप मन से छल कपट त्याग देंगे और मेहनत करेंगे। गृह ज्ञान का यही संदेश है—कर्म ही पूजा है 

अगर आप भी शनि की साडेसाती या देहिया से परेशान है तो आज से ही हनुमान चालीसा का पाठ और मजदूरों की सेवा शुरू कर दें। आपको बदलाव जरुर महसूस होगा। 

डिस्क्लेमर: यह जानकारी ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी बड़े निर्णय या रत्न धारण करने से पहले अपनी कुंडली किसी विद्वान ज्योतिषी को जरूर दिखाएं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: 

प्रश्न: शनि की साडेसाती कितने साल चलती है? 

उत्तर: शनि की साढ़ेसाती पूरे साढ़ेसात साल तक चलती है जिसमें तीन चरण होते हैं।

प्रश्न: क्या लड़कियां शनिदेव की मूर्ति को छू सकती है? 

उत्तर: शास्त्रों के अनुसार शनि देव की दृष्टि से बचने के लिए उनकी मूर्ति को सीधे नहीं देखना चाहिए और स्पष्ट करने से बचना चाहिए। मानसिक पूजा सबसे श्रेष्ठ है। 

प्रश्न: शनि देव को कौन सा फूल प्रिय है? 

उत्तर: शनि देव को नीला अपराजिता का फूल बहुत प्रिय है।

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यह लेख ग्रह ज्ञान (Grah Gyan) टीम द्वारा लिखा गया है हम आपके लिए ज्योतिष, वास्तु और धर्म से जुड़ी सटीक जानकारी लाते हैं 

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