अनेक लोगों की जिंदगी में एक ऐसी स्थिति देखने को मिलती है कमाई भी होती है पैसा भी आता है लेकिन कुछ समय बाद पता चलता है की बचत बहुत ही काम हो रही है कभी अचानक कोई जरूरी खर्च सामने आ जाता है तो कभी कर्ज या EMI का भुगतान करना पड़ता है तो और कभी रोज के कामों के छोटे-मोटे खर्चे मिलकर बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है|
कुंडली में पैसा नहीं टिकता? जानें 7 ज्योतिषीय संकेत और उपाय (2026)
ऐसी स्थिति में मन में कई बार सवाल आता है कि क्या कुंडली में ऐसा कोई संकेत होता है जिसकी वजह से पैसा नहीं टिक पाता?
ज्योतिष की पारंपरिक मान्यताओं में धन और आर्थिक स्थिति को समझने के लिए एक ग्रह को नहीं देखा जाता बल्कि दूसरा भाव 11 भव 12 भाव छठा भाव इन भावों के स्वामी और उनसे जुड़े ग्रहण का भी अध्ययन किया जाता है |
लेकिन यहां एक खास बात समझना जरूरी है कि पैसा न बच पाने का कारण हमेशा कुंडली या किसी ग्रह से जोड़ना सही नहीं होता है |
ए खर्च कर्ज परिवार की जिम्मेदारियां और आर्थिक परिस्थितियों और व्यक्ति की पैसे खर्च करने की क्षमता भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है|आज के इस आर्टिकल में हम ज्योतिषी दृष्टिकोण से और प्रैक्टिकल फाइनेंशियल हैबिट्स के माध्यम से आसान भाषा में समझाएंगे कि आपके पास पैसा क्यों नहीं दिखता है |
महत्वपूर्ण सूचना: एस्ट्रोलॉजी एक पारंपरिक विश्वास और अध्ययन पद्धति है इस आर्टिकल में दी गई जानकारी को निश्चित आर्थिक भविष्यवाणी या निवेश सलाह या धन प्राप्ति की गारंटी नहीं समझना है |

पैसा ना टिकने का मतलब क्या है ?
सबसे पहले हम यह जानेंगे कि पैसा क्यों नहीं टिकता है ?उदाहरण के लिए मान लीजिए कि किसी व्यक्ति की मासिक आय ₹50000 है यदि महीने के जरूरी खर्च 35000 है और बाकी 15000 नियमित रूप से बचाए या निवेश किए जाते हैं तो उसकी सेविंग कैपेसिटी अच्छी कहीं जा सकती है|
वहीं दूसरी और दूसरे व्यक्ति की इनकम 70000 रुपए है लेकिन उसकी मासिक खर्च 68000 है तो उसकी इनकम अधिक होने के बावजूद बहुत कम पैसा बचता है |इसलिए ज्यादा कमाई और ज्यादा संपत्ति होना एक ही बात नहीं होती है|एस्ट्रोलॉजी के अध्ययन में भी धन के अलग-अलग पहलुओं को देखा जाता है |
कुंडली में धन देखने के लिए कौन से भाव महत्वपूर्ण माने जाते हैं ?
धन से जुड़े प्रश्नों में पारंपरिक वैदिक ज्योतिष में कुछ भावों को विशेष महत्व दिया जाता है|
1. दूसरा भाव – संचित धनदूसरे भाव को धन परिवार वाणी और संचित संपत्ति से जोड़ा जाता है |इसलिए यदि सवाल हो कि किसी व्यक्ति की बचत करने की क्षमता कैसी हो सकती है तो दूसरे भाव और उसके स्वामी की स्थिति का अध्ययन किया जा सकता है |
2. 11 भाव Income और लाभ11वें भाव को आए लाभ उपलब्धियां और इच्छाओं की पूर्ति से संबंधित माना जाता है | इसलिए इनकम के विषय को समझने में 11वां भाव की महत्वपूर्ण भूमिका होती है |
3. बारहवा भाव १२ – बारहवे भाव को खर्च ,व्यय, त्याग, विदेश और कुछ अन्य मामलो में जोड़ा जाता हे |
यदि किसी व्यक्ति का सवाल हे कि ‘कमी तो होती हे लेकिन पैसा कहाँ चला जाता हे ? तो ज्योतिष में १२वे भाव को देखा जाता हे |
4. छठा भाव – कर्ज और आर्थिक दबाव
छठा भाव पारम्परिक रुप से ऋण, प्रतिस्पर्धा, रोग और दैनिक संगर्शो से जुड़ा माना जाता है|
इसलिए लोन या लगातार आर्थिक दबाव कि स्थिति को समजते समय छठे भाव को भी देखा जाता है|
कुंडली में पैसा नही टिकने के 7 बड़े ज्योतिषीय संकेत –
- दुसरे भाव या उसके स्वामी कि चुनोतिपूर्ण स्थिति –
दूसरा भाव संचित धन से जुड़ा हुआ होता है|
इसलिए यदि दुसरे भाव या उसके स्वामी कि स्थिति चुनोतिपूर्ण हो, तो एस्ट्रोलॉजी में यह देखा जाता हे कि व्यक्ति कि इनकम को सेविंग में बदलने कि स्थिति कैसी है|
लेकिन यहाँ एक गलती नही करनी चाहिए कि सिर्फ दूसरा भाव देखकर या निष्कर्ष नही निकला जा सकता कि लोगो के पास पैसा टिकेगा कि नही |
समपूर्ण कुंडली में 11और 12भाव सहित अन्य संबंधित फैक्टर भी देखना जरुरी होता है |
- बारहवे भाव का आर्थिक मामलो से मजबूत सम्बन्ध होना –
बारहवे भाव को खर्च से जुड़ा हुआ माना जाता है |
यदि कुंडली में 12 वे भाव या उसके स्वामी का धन से सम्बंधित भावो से भी खास सम्बन्ध बनता है |
कुंडली में पैसा नही टिकने का प्रमुख कारण ज्योतिष के आलावा भी आपके खुद के नेचर पर भी होता हे जिस तरह आपका नेचर हे वैसे ही आपके खर्च और शोक होते हे तो कुल मिलकर आपके खुद कि आदतों पर भी ये होता हे कि आप पैसा बचा पाएंगे कि नही क्यूंकि खाली ज्योतिष के अनुसार ही आप पैसा बचाओ ऐसा बिल्कुल भी नही है |
क्या ज्योतिषीय उपाय जरुरी है ?
ज्योतिष में अलग अलग उपाय बताये जाते है लेकिन पैसे मिलने कि गरुन्ती जैसा ज्योतिष में भी कुछ नही होता| अगर कोई व्यक्ति धार्मिक या ज्योतिषीयपरम्परा के अनुसार कुछ उअप्य करना चाहता है तो अपनी आस्था के अनुसार कर सकता है|
अपनी कुंडली में धन कि स्थिति को कैसे समजे ?
पहला भाव – दूसरा भाव – संचित धन और परिवार से जुड़े विषय के लिए |
दूसरा से 11 वा भाव – आय और लाभ के लिए |
तीसरा से 12 वा भाव – खर्च और व्यय से जुदा हुआ |
चोथा से छठा भाव – कर्ज और आर्थिक दबाव से जुड़ा
पांचवा – सम्बंधित गृह और भावेश – इनकी स्थिति और आपसी सम्बन्ध को देखे |
छठा – दशा और गोचर – समय के सन्दर्भ और पारम्परिक ज्योतिष अध्यन के लिए |
यही वजह हे कि किसी भी व्यक्ति कि कि आर्थिक स्थिति पर निष्कर्ष निकलने से पहले पूरी कुंडली का अध्यन करना उचित माना गया है |
ज्योतिष में हर बात का उपाय होता है लेकिन ये आप पर निर्भर करता है कि आप ज्योतिष को कितना मानते है और कितना विश्वास करते है| हमारी भारतीय संस्कृति में हर काम से पहले ज्योतिष को महत्त्व दिया गया है लेकिन ये भी सभी कि सोच अलग अलग होती है |
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