जन्म कुंडली के बारह भावों को ज्योतिषीय परंपरा में जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों से जोड़ा जाता है।
पहला भाव स्वयं और व्यक्तित्व, दूसरा धन व परिवार, तीसरा प्रयास व संचार, चौथा घर व घरेलू जीवन, पाँचवाँ शिक्षा व रचनात्मकता, छठा सेवा व दैनिक संघर्ष, सातवाँ साझेदारी, आठवाँ परिवर्तन, नौवाँ उच्च ज्ञान, दसवाँ कर्म व पेशा, ग्यारहवाँ लाभ और बारहवाँ खर्च व एकांत जैसे विषयों से जोड़ा जाता है।
यह सामान्य mapping है; विस्तृत व्याख्या में राशि, स्वामी ग्रह, दृष्टि और अन्य कारक भी देखे जाते हैं।
संक्षेप में
इस विषय को उसकी पारंपरिक और सामान्य जानकारी के संदर्भ में समझें। महत्वपूर्ण व्यक्तिगत निर्णय केवल इस लेख के आधार पर न लें।